भविष्यवाणी तकनीक (पृष्ठ-106)

भविष्यवाणी तकनीक


रेकी: एक अद्भुत दिव्य चिकित्सा

रेकी बौद्धिक काल से चलन में आ रही एक दिव्य चिकित्सा विद्या है जिसका या तो पलायन हो रहा है या दोहन। क्या है रेकी चिकित्सा रोग के निदान के लिए चिरपरिचित एलोपैथी, होम्योपैथी, प्राकृतिक, यूनानी, चुम्बक, हिप्नोटिज्म, आयुर्वेदिक... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंभविष्यवाणी तकनीकरेकी

मई 2016

व्यूस: 5507

एक्यूप्रेशर कितना कारगर

रोगों तथा विकारों को दूर करने के लिये जितनी चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित हुई हैं उनमें एक्यूप्रेशर सबसे पुरानी तथा अधिक प्रभावशाली है। यह पद्धति इसलिए भी अधिक प्रभावी है क्योंकि इसका सिद्धांत पूर्णरूप से प्राकृतिक है। इस पद्धत... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंएक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चरभविष्यवाणी तकनीक

मई 2016

व्यूस: 5350

रेकी उपचार: अनोखी अनुभूति है

रेकी उपचार: अनोखी अनुभूति है

भगवान सहाय श्रीवास्तव

आजकल जैसे-जैसे सुख-सुविधा के नए-नए साधन व तकनीक विकसित हो रहे हैं, वैसे-वैसे तरह-तरह के रोग, कीटाणु एवं वायरस भी पैदा हो रहे हैं। ज्योतिष ज्ञान-विज्ञान से मानसिक विकार, शारीरिक कष्ट, भविष्य के दुखों-कष्टों की जानकारी मिल सक... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंउपायभविष्यवाणी तकनीकरेकी

मई 2016

व्यूस: 5683

पंचपक्षी एवं प्रश्न शास्त्र (भाग-1)

्रत्येक मनुष्य का जन्म या तो दिन अथवा रात्रि, कृष्ण पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष एवं सप्ताह के किसी एक वार को होता है। पंच पक्षी पांच तात्त्विक स्पंदन के आधार पर पांच तरीके से शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में चंद्र के बढ़ते एवं घटते कलाओं क... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंप्रश्न कुंडलीपंच पक्षीभविष्यवाणी तकनीक

जुलाई 2015

व्यूस: 5310

पंचपक्षी एवं प्रश्न शास्त्र (भाग-2)

कोई वस्तु खो गई है वह मिलेगी अथवा नहीं? यदि कोई प्रश्नकर्ता पंच पक्षी विशेषज्ञ से किसी खोई हुई वस्तु के बारे में पूछता है तो व्यक्ति के जन्मपक्षी के गतिविधि के अनुसार इस प्रश्न का सटीक उत्तर दिया जा सकता है। यदि प्रश्न करते... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंपंच पक्षीभविष्यवाणी तकनीक

आगस्त 2015

व्यूस: 5436

पंचपक्षी शास्त्र: यात्रा

प्रत्येक मनुष्य का जन्म या तो दिन अथवा रात्रि, कृष्ण पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष एवं सप्ताह के किसी एक वार को होता है। पंच पक्षी पांच तात्त्विक स्पंदन के आधार पर पांच तरीके से शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में चंद्र के बढ़ते एवं घटते कलाओं ... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंपंच पक्षीभविष्यवाणी तकनीक

मई 2015

व्यूस: 5420

क्या कहते हैं विभिन्न पुरुषों एवं महिलाओं के चेहरे

किसी व्यक्ति के चेहरे की मासूमियत मन को छू लेती है तो किसी के चेहरे से प्रकट होता तेज अनायास ही अपनी ओर खींच लेता है। इस तरह चेहरा बिना बोले बहुत कुछ कह देता है। इस आलेख में विभिन्न पुरुषों एवं महिलाओं के चेहरों का अध्ययन किया ... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंमुखाकृति विज्ञानभविष्यवाणी तकनीक

आगस्त 2006

व्यूस: 5642

गतिविधि का समय एवं पक्षियों के बल

प्रत्येक मनुष्य का जन्म या तो दिन अथवा रात्रि, कृष्ण पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष एवं सप्ताह के किसी एक वार को होता है। पंच पक्षी पांच तात्त्विक स्पंदन के आधार पर पांच तरीके से शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में चंद्र के बढ़ते एवं घटते कलाओं ... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंपंचांगभविष्यवाणी तकनीक

मार्च 2015

व्यूस: 6652

एक्यूपंक्चर व एक्यूप्रेशर पद्धति

एक्यूपंक्चर व एक्यूप्रेशर पद्धति

भगवान सहाय श्रीवास्तव

एक्युपंक्चर चिकित्सा पद्धति में शरीर के कुछ निश्चित बिंदुओं पर सुइयां चुभाकर विभिन्न रोगों का इलाज किया जाता है। यह प्रणाली एक्युप्रेशर चिकित्सा प्रणाली से कुछ हद तक अलग है। इसमें विभिन्न केंद्रों को दबाकर सूइयों को चुभाकर ... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंएक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चरभविष्यवाणी तकनीक

मई 2016

व्यूस: 6462

कस्पल पद्धति

कस्पल पद्धति

आर.एस. चानी

कस्पल ज्योतिष का स्वर्णिम नियम यह है कि इवंेट (घटना) उस दशाकाल में फलित या घटित होती है जिस दशाकाल के ग्रह उस विशिष्ट इवेंट को देने में सक्षम हों यानि कि वह किसी विशिष्ट इवेंट/घटना का परिपूर्ण सिग्निफिकेटर बने बशर्ते गोचर ... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंभविष्यवाणी तकनीक

दिसम्बर 2015

व्यूस: 8968

पंच पक्षी की विशेषतायें एवं स्वभावगत लक्षण-1

संपूर्ण मानव समुदाय के लिए पांच भिन्न पक्षियां निरूपित की गई हैं। पक्षी का निर्धारण जन्म नक्षत्र एवं शुक्ल पक्ष/कृष्ण पक्ष में जन्म के आधार पर किया जाता है। इन पांचों पक्षियों की अपनी विशेषतायें एवं स्वभावगत लक्षण होते हैं। हमारा ... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंपंच पक्षीभविष्यवाणी तकनीक

अप्रैल 2014

व्यूस: 7125

कृष्ण पक्ष: पंच पक्षी के कार्य-2

प्रत्येक मनुष्य का जन्म या तो दिन अथवा रात्रि, कृष्ण पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष एवं सप्ताह के किसी एक वार को होता है। पंच पक्षी पांच तात्त्विक स्पंदन के आधार पर पांच तरीके से शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में चंद्र के बढ़ते एवं घटते कलाओं ... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंपंच पक्षीभविष्यवाणी तकनीक

फ़रवरी 2015

व्यूस: 7092

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